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मंगल पांडेय की 193वीं जयंती

आज 19 जुलाई को देश में आजादी की लड़ाई का पहली बार आरंभ करने वाले अमर शहीद मंगल पांडे की 103 वी जयंती है।परंतु आजादी के महानायक मंगल पांडे का जन्म तिथि विकिपीडिया की वेबसाइट पर गलत दिया गया है इससे देश के लोग भ्रमित हो रहे हैं। बलिया के नगवा गांव में जन्मे 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मंगल पांडे का जन्म तारीख विकीपीडिया के अंग्रेजी लेख पर 19 जुलाई 1827 लिखी है वही हिंदी लेख पर यह 19 जुलाई 1831 है वहीं जन्म स्थान फैजाबाद लिखी गई है इसके उपरांत कुछ सोशल साइट्स पर इसकी जानकारी भ्रामक रखीं गए हैं।


image by- yayimages.com


इस जानकारी का पता करने के लिए बलिया की जानकारों से बातचीत की गई तो उन लोगों ने मंगल पांडे का जन्म तिथि 30 जनवरी 1831 और जन्म स्थान बलिया के नगवा गांव को बताया।


ब्राह्मण परिवार में मंगल पांडे का जन्म हुआ था। उन्होंने उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध क्रांति की शुरुआत की थी। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में अंग्रेजों पर हमला कर दिया था।मंगल पांडे सबसे पहले तो ईस्ट इंडिया कंपनी में एक सैनिक के तौर पर भर्ती हुए थे। परंतु ब्रिटिश अफसरों की भारतीयों के प्रति क्रूरता को देखकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोलना आरंभ कर दिया।


  मंगल पांडे की कोलकाता की बैरकपुर छावनी में 34e बंगाल नेटिव एक इंफ्ट्री की पैदल सेना की सिपाही नंबर 1446 थे। अंग्रेज अफसरों पर गोली हुआ हमला करने और विद्रोह करने के आरोप में मंगल पांडे को फांसी की सजा दी गई थी किंतु तय की गई थी थी कि पहले ही उन्हें फांसी दे दी गई थी।


मंगल पांडे को 18 अप्रैल अट्ठारह सौ सत्तावन को फांसी दी जानी थी परंतु कहा जाता है कि वह की जल्लादों ने मंगल पांडे को फांसी देने से इंकार कर दिया जल्लादों का मानना था कि वे अपने हाथ मंगल पांडे की के खून से न रंगे कहते हुए फांसी देने से इंकार कर दिया था।


ब्रिटिश सरकार ने इसके बाद 4 जून जल्लादों को कोलकाता से बुलाया। मंगल पांडे की फांसी की खबर सुनने के बाद छावनीयो में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ गुस्सा और भी बढ़ गया जिसे देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने फांसी 18 अप्रैल को ना देकर 10 दिन पहले 8 अप्रैल को दे दी।


"मारो फिरंगी को "दिया था नारा


वैगनर ने लिखा है कि मंगल पांडे ने इस दौरान " मारो फिरंगी को" का नारा भी दिया था ऐसा माना जाता है कि फिरंगी के खिलाफ सबसे पहले मंगल पांडे ने नारा दिया था इस वजह से मंगल पांडे को स्वतंत्रता संग्राम की पहला क्रांतिकारी माना जाता है।

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